वेद वाणी 24.02.24
💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 24.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 चमूषच्छ्येनः शकुनो विभृत्वा गोविन्दुर्द्रप्स आयुधानि बिभ्रत्। अपामूर्मिं सचमानः समुद्रं तुरीयं धाम महिषो विवक्ति॥ ऋग्वेद ९-९६-१९॥🙏💐 परमेश्वर जीवन और प्रकृति के प्रत्येक स्वरूप में विद्यमान है। वह सभी ग्रहों की गति में स्थित है। परमेश्वर समस्त…
