🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼
🙏 21.02.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼
अपामिवेदूर्मयस्तर्तुराणाः प्र मनीषा ईरते सोममच्छ।
नमस्यन्तीरुप च यन्ति सं चा च विशन्त्युशतीरुशन्तम्॥ ऋग्वेद ९-९५-३॥🙏🌼
समुद्र की लहरें किनारे पर पहुंचने के लिए जिस प्रकार आतुर होती हैं, उसी प्रकार एक साधक की ध्यानवृत्तियां उसे परमेश्वर से जोड़ने के लिए आतुर होती हैं और साधक को परमेश्वर से जोड़ भी देती है।🙏🌼
Just as the waves of the ocean are eager to reach the shore, in the same way, the meditative tendencies of a seeker are eager to connect him with God, which in fact connects the seeker with God.(Rig Ved 9-95-3)
🙏🌼#vedgsawana 🙏🌼

