वेद वाणी 22.02.24
🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️ 🙏 22.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ प्रावीविपद्वाच ऊर्मिं न सिन्धुर्गिरः सोमः पवमानो मनीषाः। अन्तः पश्यन्वृजनेमावराण्या तिष्ठति वृषभो गोषु जानन्॥ ऋग्वेद ९-९६-७॥🙏🏵️ जिस प्रकार समुद्र लहरों को प्रेरित करता है उसी प्रकार सोम उत्तम विचारों को ज्ञान वाणी में परिवर्तित करने को…
