🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️
🙏 15.02.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️
वृषा वृष्णे रोरुवदंशुरस्मै पवमानो रुशदीर्ते पयो गोः।
सहस्रमृक्वा पथिभिर्वचोविदध्वस्मभिः सूरो अण्वं वि याति॥ ऋग्वेद ९-९१-३॥🙏🏵️
सोम मनुष्य को प्रभुस्तवन की वृत्ति वाला बनाता है। यह मनुष्य को ज्ञान वाणियों के दुग्ध को प्राप्त कराता है। वाणियों का ज्ञाता इंद्रियों पर नियंत्रण करने वाला और प्रेम और अहिंसा के पद पर चलने वाला बन जाता है। वह सूक्ष्मतम रहस्य यहां तक की परमाणु से भी आगे पहुंच जाता है।🙏🏵️
Soma creates a tendency of adoration in a person for God. It makes available the milk of Gyan Vani to a person. One who understands Gyan Vani becomes one who controls the Indriyan and follows the path of love and non-violence. He breaks the subtlest mystery and reaches beyond even the atom.
(Rig Ved 9-91-3)
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