🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹
🙏 18.02.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹
परि सद्मेव पशुमान्ति होता राजा न सत्यः समितीरियानः।
सोमः पुनानः कलशाँ अयासीत्सीदन्मृगो न महिषो वनेषु॥ ऋग्वेद ९-९२-६॥🙏🌹
जिस प्रकार एक विद्वान प्रबुद्ध मनुष्यों की सभा को प्राप्त होता है। जिस प्रकार एक राजा सत्य और न्याय के लिए वचनबद्ध होकर राजसभा में आता है। उसी प्रकार सोम एक समर्पित भक्ति के मन और आत्मा को पवित्र करें और फिर एक शक्तिशाली शेर की भांति उस पर शासन करें। 🙏🌹
Just as a scholar goes to the gathering of enlightened people, Just as a king with a commitment to truth and justice comes to the Raj Sabha, Similarly, Soma should purify the mind and soul of a devoted devotee and then rule over them like a mighty lion.(Rig Ved 9-92-6)
🙏🌹#vedgsawana 🙏🌹

