💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐
🙏 17.02.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐
अच्छा नृचक्षा असरत्पवित्रे नाम दधानः कविरस्य योनौ।
सीदन्होतेव सदने चमूषूपेमग्मन्नृषयः सप्त विप्राः॥ ऋग्वेद ९-९२-२॥🙏💐
परमेश्वर का साक्षात्कार मनुष्य पवित्र अंतःकरण में किया जाता है। जो कर्मयोगी मनुष्य अपनी पांचों इंद्रियों, मन, और बुद्धि को अपने वश में करता है। वह अपने अंतःकरण को भी पवित्र कर पाता है। पवित्र अंतःकरण में परमेश्वर का साक्षात्कार संभव हो पाता है।🙏💐
God is realised in the sacred conscience of a person. The karmayogi, who controls his five senses, mind, and intellect, is also able to purify his conscience. God is realised in a pure conscience.
(Rig Ved 9-92-2)
🙏💐#vedgsawana 🙏💐

