वेद वाणी 14.04.24

🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹 🙏 14.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹 सप्त मर्यादाः कवयस्ततक्षुस्तासामेकामिदभ्यंहुरो गात्। आयोर्ह स्कम्भ उपमस्य नीळे पथां विसर्गे धरुणेषु तस्थौ॥ ऋग्वेद १०-५-६॥🙏🌹 विद्वान लोगों ने सात मर्यादाएं (चोरी, ब्रह्महत्या, गोहत्या, व्यभिचार, धोखा आदि न करना) नियत की है। इनमें से एक भी मर्यादा को…

वेद वाणी 13.04.24

💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 13.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 ऋतायिनी मायिनी सं दधाते मित्वा शिशुं जज्ञतुर्वर्धयन्ती। विश्वस्य नाभिं चरतो ध्रुवस्य कवेश्चित्तन्तुं मनसा वियन्तः॥ ऋग्वेद १०-५-३॥🙏💐 प्रभु को समर्पित सत्य मन और प्रज्ञा मस्तिष्क वाले समय की निश्चितता में चीजों को उत्पन्न करते हैं। एक शिशु…

वेद वाणी 12.04.24

🌻🌻 ।।ओ३म्।। 🌻🌻 🙏 12.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻 तनूत्यजेव तस्करा वनर्गू रशनाभिर्दशभिरभ्यधीताम्। इयं ते अग्ने नव्यसी मनीषा युक्ष्वा रथं न शुचयद्भिरङ्गैः॥ ऋग्वेद १०-४-६॥🙏🌻 जिस प्रकार दो चोर अपने दोनों हाथों की दस उंगलियों को प्रयुक्त करके किसी को रस्सियों से बांध देते हैं उसी…

वेद वाणी 11.04.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️ 🙏 11.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ शिशुं न त्वा जेन्यं वर्धयन्ती माता बिभर्ति सचनस्यमाना। धनोरधि प्रवता यासि हर्यञ्जिगीषसे पशुरिवावसृष्टः॥ ऋग्वेद १०-४-३॥🙏🏵️ जैसे मां अपने शिशु का पोषण करती है उसी प्रकार धरती मां भी हमारा पोषण करती है। प्रभु भी सदा साथ…

वेद वाणी 10.04.24

🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼 🙏 10.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼 यं त्वा जनासो अभि संचरन्ति गाव उष्णमिव व्रजं यविष्ठ। दूतो देवानामसि मर्त्यानामन्तर्महाँश्चरसि रोचनेन॥ ऋग्वेद १०-४-२॥🙏🌼 हे सर्वशक्तिमान परमात्मा ! आप सभी में विराजमान है। जिस प्रकार शीत ऋतु में उष्णता पाने के लिए गाऐं गौशाला में…

वेद वाणी 9.04.24

🌸🌸 ।।ओ३म्।। 🌸🌸 🙏 9.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸 प्र ते यक्षि प्र त इयर्मि मन्म भुवो यथा वन्द्यो नो हवेषु। धन्वन्निव प्रपा असि त्वमग्न इयक्षवे पूरवे प्रत्न राजन्॥ ऋग्वेद १०-४-१॥ हे परमेश्वर ! मैं यज्ञनिक कर्मों द्वारा आपसे संयुक्त होता हूं। मैं अपने विचार…

वेद वाणी 8.04.24

🌺🌺 ।।ओ३म्।। 🌺🌺 🙏 8.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺 भद्रो भद्रया सचमान आगात्स्वसारं जारो अभ्येति पश्चात्। सुप्रकेतैर्द्युभिरग्निर्वितिष्ठन्रुशद्भिर्वर्णैरभि राममस्थात्॥ ऋग्वेद १०-३-३॥🙏🌺 भद्र व्यक्ति अपनी कल्याणी बुद्धि से सभी का भला करना चाहता है जिस प्रकार सूर्य उषा के पीछे-पीछे आता है और अंधकार को नष्ट करके…

वेद वाणी 7.04.24

🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹 🙏 7.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹 यद्वो वयं प्रमिनाम व्रतानि विदुषां देवा अविदुष्टरासः। अग्निष्टद्विश्वमा पृणाति विद्वान्येभिर्देवाँ ऋतुभिः कल्पयाति॥ ऋग्वेद १०-२-४॥🙏🌹 यदि व्यक्ति अनजाने में विद्वानों द्वारा बताए गए व्रतों को भंग कर ले तो समझदार व्यक्ति व्रतों के पालन करने में जो…

वेद वाणी 6.04.24

💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 6.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 होतारं चित्ररथमध्वरस्य यज्ञस्ययज्ञस्य केतुं रुशन्तम्। प्रत्यर्धिं देवस्यदेवस्य मह्ना श्रिया त्वग्निमतिथिं जनानाम्॥ ऋग्वेद १०-१-५॥🙏💐 प्रभु अग्नि है अर्थात अग्रणी है। सब आवश्यक पदार्थ को प्रदान करने वाले प्रभु का हम स्तवन करते हैं। जब हम शरीर रूपी…

वेद वाणी 5.04.24

🌻🌻 ।।ओ३म्।। 🌻🌻 🙏 5.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻 अग्रे बृहन्नुषसामूर्ध्वो अस्थान्निर्जगन्वान्तमसो ज्योतिषागात्। अग्निर्भानुना रुशता स्वङ्ग आ जातो विश्वा सद्मान्यप्राः॥ ऋग्वेद १०-१-१॥🙏🌻 पूर्व के क्षितिज से भोर में उषा की पहली किरण अंधकार को समाप्त करने लगती है। सूर्य का प्रचंड प्रकाश संसार में उजाला…