वेद वाणी 7.04.24

🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹 🙏 7.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹 यद्वो वयं प्रमिनाम व्रतानि विदुषां देवा अविदुष्टरासः। अग्निष्टद्विश्वमा पृणाति विद्वान्येभिर्देवाँ ऋतुभिः कल्पयाति॥ ऋग्वेद १०-२-४॥🙏🌹 यदि व्यक्ति अनजाने में विद्वानों द्वारा बताए गए व्रतों को भंग कर ले तो समझदार व्यक्ति व्रतों के पालन करने में जो…