वेद वाणी 25.01.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️ 🙏 25.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ कविर्वेधस्या पर्येषि माहिनमत्यो न मृष्टो अभि वाजमर्षसि। अपसेधन्दुरिता सोम मृळय घृतं वसानः परि यासि निर्णिजम्॥ ऋग्वेद ९-८२-२॥🙏🏵️ काव्य रचनाकार ,सोम, उन जिज्ञासुओं को जो प्रबुद्ध होना चाहते हैं ऐसे महान मस्तिष्कों को ऊर्जा प्रदान करते…

वेद वाणी 24.01.24

🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼 🙏 24.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼 आ नः सोम पवमानः किरा वस्विन्दो भव मघवा राधसो महः। शिक्षा वयोधो वसवे सु चेतुना मा नो गयमारे अस्मत्परा सिचः॥ ऋग्वेद ९-८१-३॥🙏🌼 हे सोम ! आप सबको पवित्र करते हो। आप विश्व में शांति और…

वेद वाणी 23.01.24

🌸🌸 ।।ओ३म्।। 🌸🌸 🙏 23.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸 तं त्वा देवेभ्यो मधुमत्तमं नरः सहस्रधारं दुहते दश क्षिपः। नृभिः सोम प्रच्युतो ग्रावभिः सुतो विश्वान्देवाँ आ पवस्वा सहस्रजित्॥ ऋग्वेद ९-८०-४॥🙏🌸 देववृत्ति मनुष्य जो दस इंद्रियों के ऊपर नियंत्रण रखते हैं। हे आनंद के स्वामी !…

वेद वाणी 22.01.24

🌺🌺 ।।ओ३म्।। 🌺🌺 🙏 22.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺 सोमस्य धारा पवते नृचक्षस ऋतेन देवान्हवते दिवस्परि। बृहस्पते रवथेना वि दिद्युते समुद्रासो न सवनानि विव्यचुः॥ ऋग्वेद ९-८०-१॥🙏🌺 ज्ञान और आनंद का दिव्य सोम हमें पवित्र करें और हमें ज्ञान प्रदान करें, जिससे कि हम मानवता…

वेद वाणी 21.01.24

🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹 🙏 21.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹 अचोदसो नो धन्वन्त्विन्दवः प्र सुवानासो बृहद्दिवेषु हरयः। वि च नशन्न इषो अरातयोऽर्यो नशन्त सनिषन्त नो धियः॥ ऋग्वेद ९-७९-१॥🙏🌹 अंधकार व दुख को हरने वाला और आनंदपूर्ण प्रभु का रस हम जिज्ञासुओं को मुक्ति के पथ…

वेद वाणी 20.01.24

💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 20.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 समुद्रिया अप्सरसो मनीषिणमासीना अन्तरभि सोममक्षरन्। ता ईं हिन्वन्ति हर्म्यस्य सक्षणिं याचन्ते सुम्नं पवमानमक्षितम्॥ ऋग्वेद ९-७८-३॥🙏💐 ज्ञान के समुद्र में विचरने वाले जो यज्ञनिक कर्म करते हैं। वे इंद्रियों को बाहर भटकने नहीं देते बल्कि उनको…

वेद वाणी 19.01.24

🌻🌻 ।।ओ३म्।।🌻🌻 🙏 19.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻 एष प्र कोशे मधुमाँ अचिक्रददिन्द्रस्य वज्रो वपुषो वपुष्टरः। अभीमृतस्य सुदुघा घृतश्चुतो वाश्रा अर्षन्ति पयसेव धेनवः॥ ऋग्वेद ९-७७-१॥🙏🌻 सोम जो दिव्य आनंददायक भावना है वह आनंदमय कोष में प्रभु का आव्हान करती है। यह सोम जितेंद्रियं मनुष्य…

वेद वाणी 18.01.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।।🏵️🏵️ 🙏 18.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ शूरो न धत्त आयुधा गभस्त्योः स्वः सिषासन्रथिरो गविष्टिषु। इन्द्रस्य शुष्ममीरयन्नपस्युभिरिन्दुर्हिन्वानो अज्यते मनीषिभिः॥ ऋग्वेद ९-७६-२॥🙏🏵️ कर्मयोगी परमात्मा की बनाई हुई प्रकृति की शक्तियों का सदुपयोग करते हुए एक शूरवीर की भांति आगे बढ़ता है। वह प्रकृति के…

वेद वाणी 17.01.24

🌼🌼 ।।ओ३म्।।🌼🌼 🙏 17.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼 ऋतस्य जिह्वा पवते मधु प्रियं वक्ता पतिर्धियो अस्या अदाभ्यः। दधाति पुत्रः पित्रोरपीच्यं नाम तृतीयमधि रोचने दिवः॥ ऋग्वेद ९-७५-२॥🙏🌼 जो सत्य और मधुर बोलता है उसकी वाणी सभी को प्रसन्नता और पवित्रता देती है। ऐसा व्यक्ति सभी…

वेद वाणी 16.01.24

🌸🌸 ।।ओ३म्।।🌸🌸 🙏 16.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸 अभि प्रियाणि पवते चनोहितो नामानि यह्वो अधि येषु वर्धते। आ सूर्यस्य बृहतो बृहन्नधि रथं विष्वञ्चमरुहद्विचक्षणः॥ ऋग्वेद ९-७५-१॥🙏🌸 ईश्वर सर्वव्यापी है। वह सब में विद्यमान है। वह ही समस्त सृष्टि का निर्माता और प्रकाशक है। जो समस्त…