वेद वाणी 11.04.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️ 🙏 11.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ शिशुं न त्वा जेन्यं वर्धयन्ती माता बिभर्ति सचनस्यमाना। धनोरधि प्रवता यासि हर्यञ्जिगीषसे पशुरिवावसृष्टः॥ ऋग्वेद १०-४-३॥🙏🏵️ जैसे मां अपने शिशु का पोषण करती है उसी प्रकार धरती मां भी हमारा पोषण करती है। प्रभु भी सदा साथ…