वेद वाणी 8.04.24

🌺🌺 ।।ओ३म्।। 🌺🌺 🙏 8.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺 भद्रो भद्रया सचमान आगात्स्वसारं जारो अभ्येति पश्चात्। सुप्रकेतैर्द्युभिरग्निर्वितिष्ठन्रुशद्भिर्वर्णैरभि राममस्थात्॥ ऋग्वेद १०-३-३॥🙏🌺 भद्र व्यक्ति अपनी कल्याणी बुद्धि से सभी का भला करना चाहता है जिस प्रकार सूर्य उषा के पीछे-पीछे आता है और अंधकार को नष्ट करके…