वेद वाणी 6.04.24

💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 6.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 होतारं चित्ररथमध्वरस्य यज्ञस्ययज्ञस्य केतुं रुशन्तम्। प्रत्यर्धिं देवस्यदेवस्य मह्ना श्रिया त्वग्निमतिथिं जनानाम्॥ ऋग्वेद १०-१-५॥🙏💐 प्रभु अग्नि है अर्थात अग्रणी है। सब आवश्यक पदार्थ को प्रदान करने वाले प्रभु का हम स्तवन करते हैं। जब हम शरीर रूपी…