वेद वाणी 24.02.24

💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 24.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 चमूषच्छ्येनः शकुनो विभृत्वा गोविन्दुर्द्रप्स आयुधानि बिभ्रत्। अपामूर्मिं सचमानः समुद्रं तुरीयं धाम महिषो विवक्ति॥ ऋग्वेद ९-९६-१९॥🙏💐 परमेश्वर जीवन और प्रकृति के प्रत्येक स्वरूप में विद्यमान है। वह सभी ग्रहों की गति में स्थित है। परमेश्वर समस्त…

वेद वाणी 23.02.24

🌻🌻 ।।ओ३म्।। 🌻🌻 🙏 23.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻 शिशुं जज्ञानं हर्यतं मृजन्ति शुम्भन्ति वह्निं मरुतो गणेन। कविर्गीर्भिः काव्येना कविः सन्सोमः पवित्रमत्येति रेभन्॥ ऋग्वेद ९-९६-१७॥🙏🌻 विद्वानजन परमात्मा की अंतरात्मा में उपस्थित को ज्ञान द्वारा जानते हैं। उपासक परमात्मा के गुणों का वर्णन उपासना द्वारा…

वेद वाणी 22.02.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️ 🙏 22.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ प्रावीविपद्वाच ऊर्मिं न सिन्धुर्गिरः सोमः पवमानो मनीषाः। अन्तः पश्यन्वृजनेमावराण्या तिष्ठति वृषभो गोषु जानन्॥ ऋग्वेद ९-९६-७॥🙏🏵️ जिस प्रकार समुद्र लहरों को प्रेरित करता है उसी प्रकार सोम उत्तम विचारों को ज्ञान वाणी में परिवर्तित करने को…

वेद वाणी 21.02.24

🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼 🙏 21.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼 अपामिवेदूर्मयस्तर्तुराणाः प्र मनीषा ईरते सोममच्छ। नमस्यन्तीरुप च यन्ति सं चा च विशन्त्युशतीरुशन्तम्॥ ऋग्वेद ९-९५-३॥🙏🌼 समुद्र की लहरें किनारे पर पहुंचने के लिए जिस प्रकार आतुर होती हैं, उसी प्रकार एक साधक की ध्यानवृत्तियां उसे परमेश्वर…

वेद वाणी 20.02.24

🌸🌸 ।।ओ३म्।। 🌸🌸 🙏 20.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸 द्विता व्यूर्ण्वन्नमृतस्य धाम स्वर्विदे भुवनानि प्रथन्त। धियः पिन्वानाः स्वसरे न गाव ऋतायन्तीरभि वावश्र इन्दुम्॥ ऋग्वेद ९-९४-२॥🙏🌸 दिव्य दृष्टि वाला मनुष्य इस संसार से आगे की सोच रखता है उसे भौतिक और आध्यात्मिक दोनों खजाने को…

वेद वाणी 19.02.24

🌺🌺 ।।ओ३म्।। 🌺🌺 🙏 19.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺 साकमुक्षो मर्जयन्त स्वसारो दश धीरस्य धीतयो धनुत्रीः। हरिः पर्यद्रवज्जाः सूर्यस्य द्रोणं ननक्षे अत्यो न वाजी॥ ऋग्वेद ९-९३-१॥🙏🌺 जब साधक योगी मन के माध्यम से दस इंद्रियांवृति बहनों (पांच ज्ञानेंद्रियां और पांच कर्मेंद्रियां) को नियंत्रित करके…

वेद वाणी 18.02.24

🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹 🙏 18.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹 परि सद्मेव पशुमान्ति होता राजा न सत्यः समितीरियानः। सोमः पुनानः कलशाँ अयासीत्सीदन्मृगो न महिषो वनेषु॥ ऋग्वेद ९-९२-६॥🙏🌹 जिस प्रकार एक विद्वान प्रबुद्ध मनुष्यों की सभा को प्राप्त होता है। जिस प्रकार एक राजा सत्य और…

वेद वाणी 17.02.24

💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 17.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 अच्छा नृचक्षा असरत्पवित्रे नाम दधानः कविरस्य योनौ। सीदन्होतेव सदने चमूषूपेमग्मन्नृषयः सप्त विप्राः॥ ऋग्वेद ९-९२-२॥🙏💐 परमेश्वर का साक्षात्कार मनुष्य पवित्र अंतःकरण में किया जाता है। जो कर्मयोगी मनुष्य अपनी पांचों इंद्रियों, मन, और बुद्धि को अपने…

वेद वाणी 16.02.24

🌻🌻 ।।ओ३म्।। 🌻🌻 🙏 16.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻 परि सुवानो हरिरंशुः पवित्रे रथो न सर्जि सनये हियानः। आपच्छ्लोकमिन्द्रियं पूयमानः प्रति देवाँ अजुषत प्रयोभिः॥ ऋग्वेद ९-९२-१॥🙏🌻 दिव्य सोम पवित्र ह्रदय वाले मनुष्य के हृदय में उत्पन्न होता है। जिस प्रकार युद्ध में रथ विजय…

वेद वाणी 15.02.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️ 🙏 15.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ वृषा वृष्णे रोरुवदंशुरस्मै पवमानो रुशदीर्ते पयो गोः। सहस्रमृक्वा पथिभिर्वचोविदध्वस्मभिः सूरो अण्वं वि याति॥ ऋग्वेद ९-९१-३॥🙏🏵️ सोम मनुष्य को प्रभुस्तवन की वृत्ति वाला बनाता है। यह मनुष्य को ज्ञान वाणियों के दुग्ध को प्राप्त कराता है।…