वेद वाणी 05.01.24
🌻🌻 ।।ओ३म्।। 🌻🌻 🙏 05.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻 सूर्यस्येव रश्मयो द्रावयित्नवो मत्सरासः प्रसुपः साकमीरते। तन्तुं ततं परि सर्गास आशवो नेन्द्रादृते पवते धाम किं चन॥ ऋग्वेद ९-६९-६॥🙏🌻 परमेश्वर की बनाई हुई सृष्टि गतिशील है। गतिशीलता सोए हुए अस्तित्व को भी ऊर्जावान बनाती है। परमात्मा…
