वेद वाणी 13.04.24

💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 13.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 ऋतायिनी मायिनी सं दधाते मित्वा शिशुं जज्ञतुर्वर्धयन्ती। विश्वस्य नाभिं चरतो ध्रुवस्य कवेश्चित्तन्तुं मनसा वियन्तः॥ ऋग्वेद १०-५-३॥🙏💐 प्रभु को समर्पित सत्य मन और प्रज्ञा मस्तिष्क वाले समय की निश्चितता में चीजों को उत्पन्न करते हैं। एक शिशु…