वेद वाणी 23.01.24

🌸🌸 ।।ओ३म्।। 🌸🌸 🙏 23.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸 तं त्वा देवेभ्यो मधुमत्तमं नरः सहस्रधारं दुहते दश क्षिपः। नृभिः सोम प्रच्युतो ग्रावभिः सुतो विश्वान्देवाँ आ पवस्वा सहस्रजित्॥ ऋग्वेद ९-८०-४॥🙏🌸 देववृत्ति मनुष्य जो दस इंद्रियों के ऊपर नियंत्रण रखते हैं। हे आनंद के स्वामी !…