वेद वाणी 20.01.24

💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 20.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 समुद्रिया अप्सरसो मनीषिणमासीना अन्तरभि सोममक्षरन्। ता ईं हिन्वन्ति हर्म्यस्य सक्षणिं याचन्ते सुम्नं पवमानमक्षितम्॥ ऋग्वेद ९-७८-३॥🙏💐 ज्ञान के समुद्र में विचरने वाले जो यज्ञनिक कर्म करते हैं। वे इंद्रियों को बाहर भटकने नहीं देते बल्कि उनको…