वेद वाणी 18.01.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।।🏵️🏵️ 🙏 18.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ शूरो न धत्त आयुधा गभस्त्योः स्वः सिषासन्रथिरो गविष्टिषु। इन्द्रस्य शुष्ममीरयन्नपस्युभिरिन्दुर्हिन्वानो अज्यते मनीषिभिः॥ ऋग्वेद ९-७६-२॥🙏🏵️ कर्मयोगी परमात्मा की बनाई हुई प्रकृति की शक्तियों का सदुपयोग करते हुए एक शूरवीर की भांति आगे बढ़ता है। वह प्रकृति के…