वेद वाणी 19.02.24

🌺🌺 ।।ओ३म्।। 🌺🌺 🙏 19.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺 साकमुक्षो मर्जयन्त स्वसारो दश धीरस्य धीतयो धनुत्रीः। हरिः पर्यद्रवज्जाः सूर्यस्य द्रोणं ननक्षे अत्यो न वाजी॥ ऋग्वेद ९-९३-१॥🙏🌺 जब साधक योगी मन के माध्यम से दस इंद्रियांवृति बहनों (पांच ज्ञानेंद्रियां और पांच कर्मेंद्रियां) को नियंत्रित करके…

वेद वाणी 18.02.24

🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹 🙏 18.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹 परि सद्मेव पशुमान्ति होता राजा न सत्यः समितीरियानः। सोमः पुनानः कलशाँ अयासीत्सीदन्मृगो न महिषो वनेषु॥ ऋग्वेद ९-९२-६॥🙏🌹 जिस प्रकार एक विद्वान प्रबुद्ध मनुष्यों की सभा को प्राप्त होता है। जिस प्रकार एक राजा सत्य और…

वेद वाणी 17.02.24

💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 17.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 अच्छा नृचक्षा असरत्पवित्रे नाम दधानः कविरस्य योनौ। सीदन्होतेव सदने चमूषूपेमग्मन्नृषयः सप्त विप्राः॥ ऋग्वेद ९-९२-२॥🙏💐 परमेश्वर का साक्षात्कार मनुष्य पवित्र अंतःकरण में किया जाता है। जो कर्मयोगी मनुष्य अपनी पांचों इंद्रियों, मन, और बुद्धि को अपने…

वेद वाणी 16.02.24

🌻🌻 ।।ओ३म्।। 🌻🌻 🙏 16.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻 परि सुवानो हरिरंशुः पवित्रे रथो न सर्जि सनये हियानः। आपच्छ्लोकमिन्द्रियं पूयमानः प्रति देवाँ अजुषत प्रयोभिः॥ ऋग्वेद ९-९२-१॥🙏🌻 दिव्य सोम पवित्र ह्रदय वाले मनुष्य के हृदय में उत्पन्न होता है। जिस प्रकार युद्ध में रथ विजय…

वेद वाणी 15.02.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️ 🙏 15.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ वृषा वृष्णे रोरुवदंशुरस्मै पवमानो रुशदीर्ते पयो गोः। सहस्रमृक्वा पथिभिर्वचोविदध्वस्मभिः सूरो अण्वं वि याति॥ ऋग्वेद ९-९१-३॥🙏🏵️ सोम मनुष्य को प्रभुस्तवन की वृत्ति वाला बनाता है। यह मनुष्य को ज्ञान वाणियों के दुग्ध को प्राप्त कराता है।…

वेद वाणी 14.02.24

🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼 🙏 14.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼 असर्जि वक्वा रथ्ये यथाजौ धिया मनोता प्रथमो मनीषी। दश स्वसारो अधि सानो अव्येऽजन्ति वह्निं सदनान्यच्छ॥ ऋग्वेद ९-९१-१॥🙏🌼 जैसे रथ की दौड़ में सर्वश्रेष्ठ अश्वों को लगाया जाता है। उसी प्रकार एक प्रगतिशील समाज में शासन…

वेद वाणी 13.02.24

🌸🌸 ।।ओ३म्।। 🌸🌸 🙏 13.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸 प्र हिन्वानो जनिता रोदस्यो रथो न वाजं सनिष्यन्नयासीत्। इन्द्रं गच्छन्नायुधा संशिशानो विश्वा वसु हस्तयोरादधानः॥ ऋग्वेद ९-९०-१॥🙏🌸 हे परमात्मा ! आप हमारे हृदय में विराजमान हो। आप शुभ कर्मों की प्रेरणा देते हैं। द्युलोक और पृथ्वीलोक…

वेद वाणी 12.02.24

🌺🌺 ।।ओ३म्।। 🌺🌺 🙏 12.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺 सिंहं नसन्त मध्वो अयासं हरिमरुषं दिवो अस्य पतिम्। शूरो युत्सु प्रथमः पृच्छते गा अस्य चक्षसा परि पात्युक्षा॥ ऋग्वेद ९-८९-३॥🙏🌺 परमात्मा का सोम जो सिंह के समान वीरता, आनंद और मधुरता प्रदान करता है। जो मनुष्य…

वेद वाणी 11.02.24

🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹 🙏 11.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹 अयं सोम इन्द्र तुभ्यं सुन्वे तुभ्यं पवते त्वमस्य पाहि। त्वं ह यं चकृषे त्वं ववृष इन्दुं मदाय युज्याय सोमम्॥ ऋग्वेद ९-८८-१॥🙏🌹 हे मनुष्य ! यह परमात्मा का सोम तुम्हारे लिए है। यह तुम्हें पवित्र करता…

वेद वाणी 10.02.24

💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 10.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 एष स्य ते मधुमाँ इन्द्र सोमो वृषा वृष्णे परि पवित्रे अक्षाः। सहस्रसाः शतसा भूरिदावा शश्वत्तमं बर्हिरा वाज्यस्थात्॥ ऋग्वेद ९-८७-४॥🙏💐 हे मनुष्य ! परमात्मा के आनंद रस का अनुभव तुम अपने हृदय रूपी कलश में करो।…