वेद वाणी 29.02.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️ 🙏 29.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ अक्रान्समुद्रः प्रथमे विधर्मञ्जनयन्प्रजा भुवनस्य राजा। वृषा पवित्रे अधि सानो अव्ये बृहत्सोमो वावृधे सुवान इन्दुः॥ ऋग्वेद ९-९७-४०॥🙏🏵️ परमात्मा सभी प्राणियों और पदार्थो का स्वामी है। उससे ही सभी भूतों की उत्पत्ति, स्थिति, और संहार होता है।…

वेद वाणी 28.02.24

🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼 🙏 28.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼 तिस्रो वाच ईरयति प्र वह्निर्ऋतस्य धीतिं ब्रह्मणो मनीषाम्। गावो यन्ति गोपतिं पृच्छमानाः सोमं यन्ति मतयो वावशानाः॥ ऋग्वेद ९-९७-३४॥🙏🌼 सर्व प्रेरक परमात्मा हमें तीन प्रकार की वाणियों को धारण करने की प्रेरणा देता है। (1) नियमित…

वेद वाणी 27.02.24

🌸🌸 ।।ओ३म्।। 🌸🌸 🙏 27.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸 तक्षद्यदी मनसो वेनतो वाग्ज्येष्ठस्य वा धर्मणि क्षोरनीके। आदीमायन्वरमा वावशाना जुष्टं पतिं कलशे गाव इन्दुम्॥ ऋग्वेद ९-९७-२२॥🙏🌸 जब प्रेम और भक्ति मन की वाणी बन जाए तो वासनायें क्षीण होती हैं और सभी धारणाएं, विचार, कल्पनाएं…

वेद वाणी 26.02.24

🌺🌺 ।।ओ३म्।। 🌺🌺 🙏 26.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺 ग्रन्थिं न वि ष्य ग्रथितं पुनान ऋजुं च गातुं वृजिनं च सोम। अत्यो न क्रदो हरिरा सृजानो मर्यो देव धन्व पस्त्यावान्॥ ऋग्वेद ९-९७-१८॥🙏🌺 हे सोम ! मैं वासनाओं के बंधनों में जकड़ा हुआ हूं मुझे…

वेद वाणी 25.02.24

🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹 🙏 25.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹 प्र काव्यमुशनेव ब्रुवाणो देवो देवानां जनिमा विवक्ति। महिव्रतः शुचिबन्धुः पावकः पदा वराहो अभ्येति रेभन्॥ ऋग्वेद ९-९७-७॥🙏🌹 उत्तम विद्वान प्रकृति का निर्माण, पुनर्जन्म, मोक्ष, आदि सिद्धांतों का अच्छी प्रकार वर्णन करता है। वह दूसरों के कल्याण…

वेद वाणी 24.02.24

💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 24.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 चमूषच्छ्येनः शकुनो विभृत्वा गोविन्दुर्द्रप्स आयुधानि बिभ्रत्। अपामूर्मिं सचमानः समुद्रं तुरीयं धाम महिषो विवक्ति॥ ऋग्वेद ९-९६-१९॥🙏💐 परमेश्वर जीवन और प्रकृति के प्रत्येक स्वरूप में विद्यमान है। वह सभी ग्रहों की गति में स्थित है। परमेश्वर समस्त…

वेद वाणी 23.02.24

🌻🌻 ।।ओ३म्।। 🌻🌻 🙏 23.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻 शिशुं जज्ञानं हर्यतं मृजन्ति शुम्भन्ति वह्निं मरुतो गणेन। कविर्गीर्भिः काव्येना कविः सन्सोमः पवित्रमत्येति रेभन्॥ ऋग्वेद ९-९६-१७॥🙏🌻 विद्वानजन परमात्मा की अंतरात्मा में उपस्थित को ज्ञान द्वारा जानते हैं। उपासक परमात्मा के गुणों का वर्णन उपासना द्वारा…

वेद वाणी 22.02.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️ 🙏 22.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ प्रावीविपद्वाच ऊर्मिं न सिन्धुर्गिरः सोमः पवमानो मनीषाः। अन्तः पश्यन्वृजनेमावराण्या तिष्ठति वृषभो गोषु जानन्॥ ऋग्वेद ९-९६-७॥🙏🏵️ जिस प्रकार समुद्र लहरों को प्रेरित करता है उसी प्रकार सोम उत्तम विचारों को ज्ञान वाणी में परिवर्तित करने को…

वेद वाणी 21.02.24

🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼 🙏 21.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼 अपामिवेदूर्मयस्तर्तुराणाः प्र मनीषा ईरते सोममच्छ। नमस्यन्तीरुप च यन्ति सं चा च विशन्त्युशतीरुशन्तम्॥ ऋग्वेद ९-९५-३॥🙏🌼 समुद्र की लहरें किनारे पर पहुंचने के लिए जिस प्रकार आतुर होती हैं, उसी प्रकार एक साधक की ध्यानवृत्तियां उसे परमेश्वर…

वेद वाणी 20.02.24

🌸🌸 ।।ओ३म्।। 🌸🌸 🙏 20.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸 द्विता व्यूर्ण्वन्नमृतस्य धाम स्वर्विदे भुवनानि प्रथन्त। धियः पिन्वानाः स्वसरे न गाव ऋतायन्तीरभि वावश्र इन्दुम्॥ ऋग्वेद ९-९४-२॥🙏🌸 दिव्य दृष्टि वाला मनुष्य इस संसार से आगे की सोच रखता है उसे भौतिक और आध्यात्मिक दोनों खजाने को…