💐💐 ।।ओ३म्।।💐💐
🙏 23.03.24 वेद वाणी🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐
यस्य ते पीत्वा वृषभो वृषायतेऽस्य पीता स्वर्विदः।
स सुप्रकेतो अभ्यक्रमीदिषोऽच्छा वाजं नैतशः॥ ऋग्वेद ९-१०८-२॥🙏💐
सूर्य सात रंग की पवित्रता प्रदान करने वाली,कभी विफल न होने वाली, किरणों के रथ पर बैठकर समस्त ब्रह्मांड को प्रकाशित करता है। उसी प्रकार विद्वान मनुष्य पवित्रता प्रदान करने वाले परमेश्वर द्वारा दिए गए सात तत्वों (पांच ज्ञानेंद्रिय, मन, और बुद्धि) को शरीर रूपी रथ में जोड़ कर मोक्ष की ओर अग्रसर होता है।🙏💐
The sun yokes seven purifying and never-failing sunbeams to his chariot to illuminate the universe. Similarly, the learned people yoke, never failing to purify the God-given, seven elements (five senses, mind, and intellect) to their chariot (body) to achieve salvation. (Rig Ved 9-108-2)
🙏💐#vedgsawana🙏💐

