🏵️🏵️ ।।ओ३म्।।🏵️🏵️
🙏 21.03.24 वेद वाणी🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️
प्र सोम देववीतये सिन्धुर्न पिप्ये अर्णसा।
अंशोः पयसा मदिरो न जागृविरच्छा कोशं मधुश्चुतम्॥ ऋग्वेद ९-१०७-१२॥🙏🏵️
हे परमेश्वर ! आप आनंद और शांति के स्रोत हैं। जिस प्रकार नदियां समुद्र को जल से भरती रहती हैं उसी प्रकार आपका दिव्य प्रकाश उपासकों के अंतःकरण को मधुर आनंद से भरता रहता है। 🙏🏵️
O God ! You are the source of joy and peace. Just as rivers keep filling the ocean with water, similarly, your divine light keeps filling the hearts of the worshipers with sweet bliss.(Rig Ved 9-107-12)
🙏🏵️#vedgsawana🙏🏵️

