🌼🌼 ।।ओ३म्।।🌼🌼
🙏 20.03.24 वेद वाणी🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼
स मामृजे तिरो अण्वानि मेष्यो मीळ्हे सप्तिर्न वाजयुः।
अनुमाद्यः पवमानो मनीषिभिः सोमो विप्रेभिर्ऋक्वभिः॥ ऋग्वेद ९-१०७-११॥🙏🌼
जिस प्रकार एक घोड़ा उत्साह से चलता है उसी प्रकार एक आराधक सूक्ष्म तत्वों को जानने को उत्सुक होता है। वह ज्ञान और ऊर्जा चाहता है। उसे विद्वान संतों से ज्ञान प्राप्त करना चाहिए और फिर अपना ज्ञान दूसरों को बांटना चाहिए।🙏🌼
Just as a horse moves with enthusiasm, similarly a worshiper is eager to know the subtle elements. He wants knowledge and energy. He should acquire knowledge from learned saints and then share his knowledge with others.
(Rig Ved 9-107-11)
🙏🌼#vedgsawana🙏🌼

