🌸🌸 ।।ओ३म्।।🌸🌸
🙏 19.03.24 वेद वाणी🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸
आ सोम सुवानो अद्रिभिस्तिरो वाराण्यव्यया।
जनो न पुरि चम्वोर्विशद्धरिः सदो वनेषु दधिषे॥ ऋग्वेद ९-१०७-१०॥🙏🌸
हे शांति स्वरूप परमेश्वर के दिव्य रस ! जो परमेश्वर के प्रति समर्पण, उत्तम कर्म, और ज्ञान से प्राप्त होता है। ऐसा सोम हमारे हृदय में ऐसे प्रवेश करें और रहे जैसे कि नागरिक नगर में प्रवेश करते हैं और रहते हैं। यह हमारे शरीर को दृढ़ करें और मस्तिष्क को उज्जवल करें। 🙏🌸
O divine essence of God, which is the embodiment of peace! Which is achieved by devotion to God, good deeds, and knowledge. May such Soma enter and remain in our hearts, just as citizens enter and remain in the city. It strengthens our body and brightens our mind.
(Rig Ved 9-107-10)
🙏🌸#vedgsawana🙏🌸

