💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐
🙏 16.03.24 वेद वाणी🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐
प्र धन्वा सोम जागृविरिन्द्रायेन्दो परि स्रव।
द्युमन्तं शुष्ममा भरा स्वर्विदम्॥ ऋग्वेद ९-१०६-४॥🙏💐
हे शांति स्वरूप परमात्मा के आनंद रस ! दूसरों के हित के कार्य करने वाले कर्मयोगियों के लिए तुम सदैव प्रवाहित होते रहो। तुम ऐसी उत्तम आत्माओं को सदैव प्रकाशित करते रहो।🙏💐
O blissful essence of God, who is the embodiment of peace ! May you always flow for the Karma Yogis who work for the benefit of others. May you always keep enlightening such noble souls.(Rig Ved 9-106-4)
🙏💐#vedgsawana🙏💐

