🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️
🙏 07.03.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️
सहस्रधारः पवते समुद्रो वाचमीङ्खयः।
सोमः पती रयीणां सखेन्द्रस्य दिवेदिवे॥ ऋग्वेद ९-१०१-६॥🙏🏵️
परमात्मा गुणों का महासागर है। वह कर्मयोगियों पर हजारों प्रकार के आनंद की वृष्टि करता है। वह प्रतिदिन प्रेरणा प्रदान करता है। वह हमें पवित्र करता है। वह आत्मा का सखा है।🙏🏵️
God is an ocean of qualities. He showers thousands of types of happiness on the Karma Yogis. He provides inspiration every day. He purifies us. He is the friend of the soul.(Rig Ved 9-101-6)
🙏🏵️#vedgsawana 🙏🏵️

