🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼
🙏 28.02.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼
तिस्रो वाच ईरयति प्र वह्निर्ऋतस्य धीतिं ब्रह्मणो मनीषाम्।
गावो यन्ति गोपतिं पृच्छमानाः सोमं यन्ति मतयो वावशानाः॥ ऋग्वेद ९-९७-३४॥🙏🌼
सर्व प्रेरक परमात्मा हमें तीन प्रकार की वाणियों को धारण करने की प्रेरणा देता है। (1) नियमित जीवन के कार्य हेतु सत्य वाणी। (2) शब्द ब्रह्म रूप वेदों की दिव्य वाणी। (3) मन रूप गहन विचार की वाणी जो दिव्यता की ओर प्रेरित करती है। मेधावी लोग जो इस प्रकार की वाणियों को धारण करते हैं उनकी यह वाणियां परमात्मा को ऐसे प्राप्त होती हैं जिस प्रकार गायें गोस्वामी को प्राप्त होती है।🙏🌼
The Almighty God inspires us to adopt three types of Vani.
(1) Truthful Vani for day today business.
(2) The divine Vani of the Vedas.
(3) Deeper language of silence to transcend to the divinity. The Vani of such intelligent people reach to the God in the same way as cows reach to the herd of their master.
(Rig Ved 9-97-34)
🙏🌼#vedgsawana 🙏🌼

