🌸🌸 ।।ओ३म्।। 🌸🌸
🙏 27.02.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸
तक्षद्यदी मनसो वेनतो वाग्ज्येष्ठस्य वा धर्मणि क्षोरनीके।
आदीमायन्वरमा वावशाना जुष्टं पतिं कलशे गाव इन्दुम्॥ ऋग्वेद ९-९७-२२॥🙏🌸
जब प्रेम और भक्ति मन की वाणी बन जाए तो वासनायें क्षीण होती हैं और सभी धारणाएं, विचार, कल्पनाएं आत्मा के अंदर परमेश्वर की ओर स्थापित हो जाती हैं। हमें परमेश्वर के ज्ञान का लाभ प्राप्त होता है।🙏🌸
When love and devotion become the voice of the mind, desires diminish, and all notions, thoughts, and imaginations are established within the soul towards God. We get the benefit of God’s knowledge. (Rig Ved 9-97-22)
🙏🌸#vedgsawana 🙏🌸

