🌺🌺 ।।ओ३म्।। 🌺🌺
🙏 26.02.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺
ग्रन्थिं न वि ष्य ग्रथितं पुनान ऋजुं च गातुं वृजिनं च सोम।
अत्यो न क्रदो हरिरा सृजानो मर्यो देव धन्व पस्त्यावान्॥ ऋग्वेद ९-९७-१८॥🙏🌺
हे सोम ! मैं वासनाओं के बंधनों में जकड़ा हुआ हूं मुझे तुम इनसे मुक्ति दिला दो। एक-एक करके मेरे बंधनों की गाठों को तुम खोल दो, जिससे कि मैं सबल और क्रियाशील बनकर जीवन के सीधे सरल मार्ग पर अग्रसर हो सकूं।🙏🌺
O Soma ! I am trapped in the bonds of desires, please liberate me from them. You untie the knots of my bonds one by one, so that I can become strong and active and move forward on the straight and simple path of life.(Rig Ved 9-97-18)
🙏🌺 #vedgsawana 🙏🌺

