🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹
🙏 25.02.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹
प्र काव्यमुशनेव ब्रुवाणो देवो देवानां जनिमा विवक्ति।
महिव्रतः शुचिबन्धुः पावकः पदा वराहो अभ्येति रेभन्॥ ऋग्वेद ९-९७-७॥🙏🌹
उत्तम विद्वान प्रकृति का निर्माण, पुनर्जन्म, मोक्ष, आदि सिद्धांतों का अच्छी प्रकार वर्णन करता है। वह दूसरों के कल्याण के लिए कटिबद्ध होता है। उसके वर्णन में पवित्रता और काव्यता होती है। वह दूसरों को पवित्र करता है और उनको सन्मार्ग दिखाता है। उसमें अटूट अनुशासन और प्रतिबद्धता होती है।🙏🌹
The noble scholar thoroughly describes the principles of the creation of the universe, reincarnation, salvation, etc. He is committed to the welfare of others. His explanations are pure and poetic. He purifies others and shows them the right path. He has unwavering discipline and commitment.
(Rig Ved 9-97-7)
🙏🌹#vedgsawana 🙏🌹

