🌺🌺 ।।ओ३म्।। 🌺🌺
🙏 05.02.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺
प्र रेभ एत्यति वारमव्ययं वृषा वनेष्वव चक्रदद्धरिः।
सं धीतयो वावशाना अनूषत शिशुं रिहन्ति मतयः पनिप्नतम्॥ ऋग्वेद ९-८६-३१॥🙏🌺
पूर्ण दिव्य ओ३म् एक गर्जन करते हुए इस विनाशी संसार से आगे बढ़ जाता है। जो मनुष्य अपने मन को अन्य वृत्तियों से हटाकर परमेश्वर पर केंद्रित करते हैं वे परमेश्वर का साक्षात्कार कर पाते हैं। बुद्धिमान मनुष्य इस जगत के बनाने वाले परमेश्वर की स्तुति करते हैं।🙏🌺
The Supreme Divine Om, making a roar, moves beyond this perishable world. People who concentrate on God by diverting their mind from other tendencies are able to realize God. Intelligent people praise God, the creator of this world.
(Rig Ved 9-86-31)
🙏🌺#vedgsawana 🙏🌺

