🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹
🙏 04.02.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹
मनीषिभिः पवते पूर्व्यः कविर्नृभिर्यतः परि कोशाँ अचिक्रदत्।
त्रितस्य नाम जनयन्मधु क्षरदिन्द्रस्य वायोः सख्याय कर्तवे॥ ऋग्वेद ९-८६-२०॥🙏🌹
ईश्वर अनादि है। वह इस जगत का रचयिता है। वह प्रकृति के सभी रूपों को तीन गुणों – सत्, रज्, और तम् में विभक्त करता है। जो उसका ध्यान करते हैं वह उनका सखा बन जाता है और उन्हें दिव्य आनंद प्राप्त कराता है।🙏🌹
God is eternal. He is the creator of this world. He divides all forms of nature into three qualities: Sat, Raja, and Tam. He becomes the friend of those who meditate on him and gives such persons divine bliss.
(Rig Ved 9-86-20)
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