वेद वाणी 11.01.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️ 🙏 11.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ स्रक्वे द्रप्सस्य धमतः समस्वरन्नृतस्य योना समरन्त नाभयः। त्रीन्स मूर्ध्नो असुरश्चक्र आरभे सत्यस्य नावः सुकृतमपीपरन्॥ ऋग्वेद ९-७३-१॥🙏🏵️ परमात्मा ने तीन प्रकार अर्थात सत्व्, रजस्, और तमस् को समस्त सृष्टि में प्रकट किया है। एक कण से…

वेद वाणी 10.01.24

🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼 🙏 10.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼 अरममाणो अत्येति गा अभि सूर्यस्य प्रियं दुहितुस्तिरो रवम्। अन्वस्मै *जोषमभरद्विनंगृसः सं द्वयीभिः स्वसृभिः क्षेति जामिभिः॥ ऋग्वेद ९-७२-३॥🙏🌼 जितेंद्रियं कर्मयोगी इंद्रियों की विलासिता के प्रति उदासीन हो जाते हैं। वे सूर्य की बेटी उषा के सम्मुख…

वेद वाणी 09.01.24

🌸🌸 ।।ओ३म्।। 🌸🌸 🙏 09.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸 श्येनो न योनिं सदनं धिया कृतं हिरण्ययमासदं देव एषति। ए रिणन्ति बर्हिषि प्रियं गिराश्वो न देवाँ अप्येति यज्ञियः॥ ऋग्वेद ९-७१-६॥🙏🌸 जिस प्रकार एक बाज अपने घोंसले में आराम से रहता है उसी प्रकार परमेश्वर का…

वेद वाणी 08.01.24

🌺🌺।।ओ३म्।। 🌺🌺 🙏 08.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺 समी रथं न भुरिजोरहेषत दश स्वसारो अदितेरुपस्थ आ। जिगादुप ज्रयति गोरपीच्यं पदं यदस्य मतुथा अजीजनन्॥ ऋग्वेद ९-७१-५॥🙏🌺 हमारे हाथों की दस उंगलियां जिस प्रकार एक रथ को नियंत्रित करती हैं उसी प्रकार दस इंद्रियां और दस…

वेद वाणी 07.01.24

🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹 🙏 07.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹 प्र कृष्टिहेव शूष एति रोरुवदसुर्यं वर्णं नि रिणीते अस्य तम्। जहाति वव्रिं पितुरेति निष्कृतमुपप्रुतं कृणुते निर्णिजं तना॥ ऋग्वेद ९-७१-२॥🙏🌹 इस जगत की उत्पत्ति परमात्मा ने की है। वह सर्वत्र विद्यमान है। जो असुर हैं उन्हें…

वेद वाणी 06.01.24

💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 06.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 त्रिरस्मै सप्त धेनवो दुदुह्रे सत्यामाशिरं पूर्व्ये व्योमनि। चत्वार्यन्या भुवनानि निर्णिजे चारूणि चक्रे यदृतैरवर्धत॥ ऋग्वेद ९-७०-१॥🙏💐 तीन बार 7 अर्थात 21 तत्वों द्वारा इस सृष्टि की उत्पत्ति हुई है। परमात्मा ने मूलप्रकृति (सत्य, रज्, तम्) द्वारा…

वेद वाणी 05.01.24

🌻🌻 ।।ओ३म्।। 🌻🌻 🙏 05.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻 सूर्यस्येव रश्मयो द्रावयित्नवो मत्सरासः प्रसुपः साकमीरते। तन्तुं ततं परि सर्गास आशवो नेन्द्रादृते पवते धाम किं चन॥ ऋग्वेद ९-६९-६॥🙏🌻 परमेश्वर की बनाई हुई सृष्टि गतिशील है। गतिशीलता सोए हुए अस्तित्व को भी ऊर्जावान बनाती है। परमात्मा…

वेद वाणी 04.01.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️ 🙏 04.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ उपो मतिः पृच्यते सिच्यते मधु मन्द्राजनी चोदते अन्तरासनि। पवमानः संतनिः प्रघ्नतामिव मधुमान्द्रप्सः परि वारमर्षति॥ ऋग्वेद ९-६९-२॥🙏🏵️ जब एक उपासक अपनी बुद्धि को देवत्व से संयुक्त करता है तो पवित्र दिव्यता का प्रवाह अंतकरण में होने…

वेद वाणी 03.01.24

🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼 🙏 03.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼 सं दक्षेण मनसा जायते कविर्ऋतस्य गर्भो निहितो यमा परः। यूना ह सन्ता प्रथमं वि जज्ञतुर्गुहा हितं जनिम नेममुद्यतम्॥ ऋग्वेद ९-६८-५॥🙏🌼 रचनात्मक आत्मा शरीर में प्रवेश करती है और शरीर उत्पन्न होता है। मन और उत्कर्ष…

वेद वाणी 02.01.24

🌸🌸 ।।ओ३म्।। 🌸🌸 🙏 02.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸 प्र देवमच्छा मधुमन्त इन्दवोऽसिष्यदन्त गाव आ न धेनवः। बर्हिषदो वचनावन्त ऊधभिः परिस्रुतमुस्रिया निर्णिजं धिरे॥ ऋग्वेद ९-६८-१॥🙏🌸 मधुर वाणी वाले परम विद्वान परमेश्वर की ओर इस प्रकार जाते हैं जैसे कि दुधारू गाय की ओर बछड़ा…