वेद वाणी 08.01.24

🌺🌺।।ओ३म्।। 🌺🌺 🙏 08.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺 समी रथं न भुरिजोरहेषत दश स्वसारो अदितेरुपस्थ आ। जिगादुप ज्रयति गोरपीच्यं पदं यदस्य मतुथा अजीजनन्॥ ऋग्वेद ९-७१-५॥🙏🌺 हमारे हाथों की दस उंगलियां जिस प्रकार एक रथ को नियंत्रित करती हैं उसी प्रकार दस इंद्रियां और दस…