वेद वाणी 10.01.24
🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼 🙏 10.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼 अरममाणो अत्येति गा अभि सूर्यस्य प्रियं दुहितुस्तिरो रवम्। अन्वस्मै *जोषमभरद्विनंगृसः सं द्वयीभिः स्वसृभिः क्षेति जामिभिः॥ ऋग्वेद ९-७२-३॥🙏🌼 जितेंद्रियं कर्मयोगी इंद्रियों की विलासिता के प्रति उदासीन हो जाते हैं। वे सूर्य की बेटी उषा के सम्मुख…
