🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼
🙏 31.01.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼
अत्यं मृजन्ति कलशे दश क्षिपः प्र विप्राणां मतयो वाच ईरते।
पवमाना अभ्यर्षन्ति सुष्टुतिमेन्द्रं विशन्ति मदिरास इन्दवः॥ ऋग्वेद ९-८५-७॥🙏🌼
इंद्रियां, मन और दस प्राण दिव्यता की धारा को आत्मा तक पहुंचाते हैं। जिससे परमात्मा का साक्षात्कार पवित्र आत्मा द्वारा होता है। दिव्यता शरीर में व्याप्त होकर शक्ति और आनंद प्रदान करती है।🙏🌼
The senses, mind, and ten pranas convey the stream of divinity to the soul. Due to which God is realized through the Holy Spirit. Divinity permeates the body and provides strength and joy. (Rig Ved 9-85-7)
🌼🙏#vedgsawana 🙏🌼

