🌸🌸 ।।ओ३म्।। 🌸🌸
🙏 30.01.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸
कनिक्रदत्कलशे गोभिरज्यसे व्यव्ययं समया वारमर्षसि।
मर्मृज्यमानो अत्यो न सानसिरिन्द्रस्य सोम जठरे समक्षरः॥ ऋग्वेद ९-८५-५॥🙏🌸
हे सोम ! आप तरंगित करते हुए विद्वानों के अंतकरण में पहुंचकर परमेश्वर का साक्षात्कार कराते हो। प्रभुस्तवन करने से ज्ञान वृती प्राप्त होती है, जिससे जीवन के संघर्ष में विजय प्राप्त होती है।🙏🌸
O Soma ! By making waves, you reach into the hearts of scholars and make them realize God. By adoration of God one acquires knowledge which leads to victory in the struggle of life.
(Rig Ved 9-85-5)
🙏🌸#vedgsawana🙏🌸

