🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️
🙏 01.02.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️
प्र त आश्विनीः पवमान धीजुवो दिव्या असृग्रन्पयसा धरीमणि।
प्रान्तर्ऋषय स्थाविरीरसृक्षत ये त्वा मृजन्त्यृषिषाण वेधसः॥ ऋग्वेद ९-८६-४।।🙏🏵️
परमात्मा सभी को पवित्र करते हैं। उनकी ज्ञान रश्मि विद्युत की गति से आत्मा में प्रकट होती है। ज्ञानी मनुष्य उन दिव्य ज्ञान धाराओं का अपने हृदय में साक्षात्कार करते हैं आप भी ऐसा ही करें।🙏🏵️
God purifies everyone. His divine rays of knowledge appear in the soul with the speed of electricity. Wise people experience those divine streams of knowledge in their hearts; you too should do the same.
(Rig Ved 9-86-4)
🙏🏵️#vedgsawana🙏🏵️

