💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐
🙏 27.01.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐
तपोष्पवित्रं विततं दिवस्पदे शोचन्तो अस्य तन्तवो व्यस्थिरन्।
अवन्त्यस्य पवीतारमाशवो दिवस्पृष्ठमधि तिष्ठन्ति चेतसा॥ ऋग्वेद ९-८३-२॥🙏💐
परमेश्वर के दिव्य प्रकाश की किरणें तपस्वी मनुष्य के मस्तिष्क रूपी द्युलोक को आलोकित करती हैं। जो लोग तपस्वी हैं वे ज्ञानशिखर के उच्च पद को ग्रहण करते हैं। हमें भी तपस्वी बनना चाहिए।🙏💐
The rays of God’s divine light illuminate the celestial world in the form of the mind of an ascetic man. Those who are ascetics attain the high position of the peak of knowledge. We should also become ascetics.
(Rig Ved 9-83-2)
🙏💐#vedgsawana🙏💐

