🌻🌻 ।।ओ३म्।। 🌻🌻
🙏 26.01.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻
🙏🌻 सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं🙏🌻
जायेव पत्यावधि शेव मंहसे पज्राया गर्भ शृणुहि ब्रवीमि ते।
अन्तर्वाणीषु प्र चरा सु जीवसेऽनिन्द्यो वृजने सोम जागृहि॥ ऋग्वेद ९-८२-४॥🙏🌻
हे जीवात्मा ! जिस प्रकार एक सदाचारी पत्नी की अपने पति में प्रीति होती है। वैसे ही आप परमेश्वर के बने हुए नियमों के अंतर्गत रहते हुए उससे प्रीति करो। आप दोषों से दूर होकर सद्कर्म करते हुए अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करो।🙏🌻
O Jeevatma ! Just as a virtuous wife loves her husband, you should love God while living within the laws made by Him. Stay away from sin and achieve the goal of your life by doing good deeds.(Rig Ved 9-82-4)
🙏🌻 #vedgsawana🙏🌻

