🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹
🙏 28.01.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹
एष स्य सोमः पवते सहस्रजिद्धिन्वानो वाचमिषिरामुषर्बुधम्।
इन्दुः समुद्रमुदियर्ति वायुभिरेन्द्रस्य हार्दि कलशेषु सीदति॥ ऋग्वेद ९-८४-४॥🙏🌹
दिव्य सोम उषाकाल में प्रबुद्ध करने वाली विद्वानों की वाणी को प्रेरित करता है जो सबको पवित्र करती हैं। परमेश्वर अंतरिक्ष को वर्षणशील बनाता है। वह अपने ज्ञान रूप समुद्र को हमारे अंदर की ओर प्रेरित करता है।🙏🌹
Divine Soma inspires in the dawn the words of enlightened scholars who purify all. God makes space rain enabled. He inspires the ocean of knowledge to move towards the inside of us.
(Rig Ved 9-84-4)
🙏🌹#vedgsawana 🙏🌹

