🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️
🙏 25.01.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️
कविर्वेधस्या पर्येषि माहिनमत्यो न मृष्टो अभि वाजमर्षसि।
अपसेधन्दुरिता सोम मृळय घृतं वसानः परि यासि निर्णिजम्॥ ऋग्वेद ९-८२-२॥🙏🏵️
काव्य रचनाकार ,सोम, उन जिज्ञासुओं को जो प्रबुद्ध होना चाहते हैं ऐसे महान मस्तिष्कों को ऊर्जा प्रदान करते हैं। हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि हे सर्वज्ञ प्रकाश और शांति के स्वामी ! हमारे आध्यात्मिक यज्ञ को सफल करो हमारी पाप वृत्ति को दूर करो।🙏🏵️
Soma, the poetic creator, provides energy to such great minds who are seekers who want to be enlightened. We pray to You, O Lord of Omniscient Light and Peace ! Make our spiritual Yajana successful and dispel our sinful tendencies.
(Rig Ved 9-82-2)
🙏🏵️#vedgsawana🙏🏵️

