वेद वाणी 15.01.24

🌺🌺 ।।ओ३म्।।🌺🌺 🙏 15.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺 अध श्वेतं कलशं गोभिरक्तं कार्ष्मन्ना वाज्यक्रमीत्ससवान्। आ हिन्विरे मनसा देवयन्तः कक्षीवते शतहिमाय गोनाम्॥ ऋग्वेद ९-७४-८॥🙏🌺 जिस प्रकार एक प्रतिस्पर्धा का घोड़ा तीव्रता से अपनी विजय रेखा की ओर बढ़ता है। उसी प्रकार दिव्य प्रकाश एक पवित्र…

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वेद वाणी 14.01.24

🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹 🙏 14.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹 शिशुर्न जातोऽव चक्रदद्वने स्वर्यद्वाज्यरुषः सिषासति। दिवो रेतसा सचते पयोवृधा तमीमहे सुमती शर्म सप्रथः॥ ऋग्वेद ९-७४-१॥🙏🌹 जब अस्तित्व की इस वन भूमि में एक शिशु जन्म लेता है तो वह अपने पोषण के लिए क्रंदन करता…

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वेद वाणी 13.01.24

💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 13.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 पवित्रवन्तः परि वाचमासते पितैषां प्रत्नो अभि रक्षति व्रतम्। महः समुद्रं वरुणस्तिरो दधे धीरा इच्छेकुर्धरुणेष्वारभम्॥ ऋग्वेद ९-७३-३॥🙏💐 पवित्र मन और चरित्र वाला कर्मयोगी ज्ञान की वाणियों के साथ खड़ा होता है। सनातन पिता परमात्मा उसके धर्म…

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वेद वाणी 12.01.24

🙏🌻 ।।ओ३म्।। 🌻🌻 🙏 12.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻 सम्यक्सम्यञ्चो महिषा अहेषत सिन्धोरूर्मावधि वेना अवीविपन्। मधोर्धाराभिर्जनयन्तो अर्कमित्प्रियामिन्द्रस्य तन्वमवीवृधन्॥ ऋग्वेद ९-७३-२॥🙏🌻 ज्ञान, कर्म, उपासना, द्वारा प्रभु की प्राप्ति की कामना करने वाले मनुष्य वासनाओं को दूर करते हुए इस भवसागर की लहरों से पार उतर…

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वेद वाणी 11.01.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️ 🙏 11.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ स्रक्वे द्रप्सस्य धमतः समस्वरन्नृतस्य योना समरन्त नाभयः। त्रीन्स मूर्ध्नो असुरश्चक्र आरभे सत्यस्य नावः सुकृतमपीपरन्॥ ऋग्वेद ९-७३-१॥🙏🏵️ परमात्मा ने तीन प्रकार अर्थात सत्व्, रजस्, और तमस् को समस्त सृष्टि में प्रकट किया है। एक कण से…

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वेद वाणी 10.01.24

🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼 🙏 10.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼 अरममाणो अत्येति गा अभि सूर्यस्य प्रियं दुहितुस्तिरो रवम्। अन्वस्मै *जोषमभरद्विनंगृसः सं द्वयीभिः स्वसृभिः क्षेति जामिभिः॥ ऋग्वेद ९-७२-३॥🙏🌼 जितेंद्रियं कर्मयोगी इंद्रियों की विलासिता के प्रति उदासीन हो जाते हैं। वे सूर्य की बेटी उषा के सम्मुख…

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वेद वाणी 09.01.24

🌸🌸 ।।ओ३म्।। 🌸🌸 🙏 09.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸 श्येनो न योनिं सदनं धिया कृतं हिरण्ययमासदं देव एषति। ए रिणन्ति बर्हिषि प्रियं गिराश्वो न देवाँ अप्येति यज्ञियः॥ ऋग्वेद ९-७१-६॥🙏🌸 जिस प्रकार एक बाज अपने घोंसले में आराम से रहता है उसी प्रकार परमेश्वर का…

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वेद वाणी 08.01.24

🌺🌺।।ओ३म्।। 🌺🌺 🙏 08.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺 समी रथं न भुरिजोरहेषत दश स्वसारो अदितेरुपस्थ आ। जिगादुप ज्रयति गोरपीच्यं पदं यदस्य मतुथा अजीजनन्॥ ऋग्वेद ९-७१-५॥🙏🌺 हमारे हाथों की दस उंगलियां जिस प्रकार एक रथ को नियंत्रित करती हैं उसी प्रकार दस इंद्रियां और दस…

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वेद वाणी 07.01.24

🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹 🙏 07.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹 प्र कृष्टिहेव शूष एति रोरुवदसुर्यं वर्णं नि रिणीते अस्य तम्। जहाति वव्रिं पितुरेति निष्कृतमुपप्रुतं कृणुते निर्णिजं तना॥ ऋग्वेद ९-७१-२॥🙏🌹 इस जगत की उत्पत्ति परमात्मा ने की है। वह सर्वत्र विद्यमान है। जो असुर हैं उन्हें…

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वेद वाणी 06.01.24

💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 06.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 त्रिरस्मै सप्त धेनवो दुदुह्रे सत्यामाशिरं पूर्व्ये व्योमनि। चत्वार्यन्या भुवनानि निर्णिजे चारूणि चक्रे यदृतैरवर्धत॥ ऋग्वेद ९-७०-१॥🙏💐 तीन बार 7 अर्थात 21 तत्वों द्वारा इस सृष्टि की उत्पत्ति हुई है। परमात्मा ने मूलप्रकृति (सत्य, रज्, तम्) द्वारा…

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