वेद वाणी 25.03.24

🌺🌺 ।।ओ३म्।।🌺🌺 🙏 25.03.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺 य उस्रिया अप्या अन्तरश्मनो निर्गा अकृन्तदोजसा। अभि व्रजं तत्निषे गव्यमश्व्यं वर्मीव धृष्णवा रुज॥ ऋग्वेद ९-१०८-६॥🙏🌺 परमेश्वर सूर्य किरणों की बधाओं को दूर करके मेघों को चीरकर किरणों को पृथ्वी पर पहुंचाते हैं। परमेश्वर आप हमारे प्रकाश की…

Details

वेद वाणी 24.03.24

🌹🌹 ।।ओ३म्।।🌹🌹 🙏 24.03.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹 येना नवग्वो दध्यङ्ङपोर्णुते येन विप्रास आपिरे। देवानां सुम्ने अमृतस्य चारुणो येन श्रवांस्यानशुः॥ ऋग्वेद ९-१०८-४॥🙏🌹 सोम आत्मज्ञान की वह भावना है जिसके द्वारा योगी देवत्व के पथ पर चलते हुए मोक्ष को प्राप्त करते हैं। ऐसे सिद्ध संतों…

Details

वेद वाणी 23.03.24

💐💐 ।।ओ३म्।।💐💐 🙏 23.03.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 यस्य ते पीत्वा वृषभो वृषायतेऽस्य पीता स्वर्विदः। स सुप्रकेतो अभ्यक्रमीदिषोऽच्छा वाजं नैतशः॥ ऋग्वेद ९-१०८-२॥🙏💐 सूर्य सात रंग की पवित्रता प्रदान करने वाली,कभी विफल न होने वाली, किरणों के रथ पर बैठकर समस्त ब्रह्मांड को प्रकाशित करता है।…

Details

वेद वाणी 22.03.24

🌻🌻 ।।ओ३म्।।🌻🌻 🙏 22.03.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻 अभि सोमास आयवः पवन्ते मद्यं मदम्। समुद्रस्याधि विष्टपि मनीषिणो मत्सरासः स्वर्विदः॥ ऋग्वेद ९-१०७-१४॥🙏🌻 ज्ञानी लोग अपने आप को पवित्र करते हैं। वे अपने ज्ञान,कर्म और उपासना द्वारा परमात्मा के आनंद को प्राप्त करने के पात्र बनते हैं।…

Details

वेद वाणी 21.03.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।।🏵️🏵️ 🙏 21.03.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ प्र सोम देववीतये सिन्धुर्न पिप्ये अर्णसा। अंशोः पयसा मदिरो न जागृविरच्छा कोशं मधुश्चुतम्॥ ऋग्वेद ९-१०७-१२॥🙏🏵️ हे परमेश्वर ! आप आनंद और शांति के स्रोत हैं। जिस प्रकार नदियां समुद्र को जल से भरती रहती हैं उसी प्रकार…

Details

वेद वाणी 20.03.24

🌼🌼 ।।ओ३म्।।🌼🌼 🙏 20.03.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼 स मामृजे तिरो अण्वानि मेष्यो मीळ्हे सप्तिर्न वाजयुः। अनुमाद्यः पवमानो मनीषिभिः सोमो विप्रेभिर्ऋक्वभिः॥ ऋग्वेद ९-१०७-११॥🙏🌼 जिस प्रकार एक घोड़ा उत्साह से चलता है उसी प्रकार एक आराधक सूक्ष्म तत्वों को जानने को उत्सुक होता है। वह ज्ञान…

Details

वेद वाणी 19.03.24

🌸🌸 ।।ओ३म्।।🌸🌸 🙏 19.03.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸 आ सोम सुवानो अद्रिभिस्तिरो वाराण्यव्यया। जनो न पुरि चम्वोर्विशद्धरिः सदो वनेषु दधिषे॥ ऋग्वेद ९-१०७-१०॥🙏🌸 हे शांति स्वरूप परमेश्वर के दिव्य रस ! जो परमेश्वर के प्रति समर्पण, उत्तम कर्म, और ज्ञान से प्राप्त होता है। ऐसा सोम…

Details

वेद वाणी 18.03.24

🌺🌺 ।।ओ३म्।।🌺🌺 🙏 18.03.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺 परि सुवानश्चक्षसे देवमादनः क्रतुरिन्दुर्विचक्षणः॥ ऋग्वेद ९-१०७-३॥🙏🌺 शरीर को सभी ओर से प्रेरित करने वाला सोम ज्ञान का ईंधन होता है। यह हमारी शक्ति का साधन बनता है। हम प्रार्थना करते हैं कि यह हमें देववृति की ओर…

Details

वेद वाणी 17.03.24

🌹🌹 ।।ओ३म्।।🌹🌹 🙏 17.03.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹 पवस्व देववीतय इन्दो धाराभिरोजसा। आ कलशं मधुमान्सोम नः सदः॥ ऋग्वेद ९-१०६-७॥🙏🌹 हे परमात्मा ! हमें पवित्र करो। हमें ज्ञान प्रदान करो जिससे कि हम देवत्व के पथ पर चलें। हमें आपकी उपस्थिति का अनुभव सदैव अपने अंतःकरण…

Details

वेद वाणी 16.03.24

💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐 🙏 16.03.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐 प्र धन्वा सोम जागृविरिन्द्रायेन्दो परि स्रव। द्युमन्तं शुष्ममा भरा स्वर्विदम्॥ ऋग्वेद ९-१०६-४॥🙏💐 हे शांति स्वरूप परमात्मा के आनंद रस ! दूसरों के हित के कार्य करने वाले कर्मयोगियों के लिए तुम सदैव प्रवाहित होते रहो। तुम…

Details