🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼
🙏 10.04.24 वेद वाणी🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼
यं त्वा जनासो अभि संचरन्ति गाव उष्णमिव व्रजं यविष्ठ।
दूतो देवानामसि मर्त्यानामन्तर्महाँश्चरसि रोचनेन॥ ऋग्वेद १०-४-२॥🙏🌼
हे सर्वशक्तिमान परमात्मा ! आप सभी में विराजमान है। जिस प्रकार शीत ऋतु में उष्णता पाने के लिए गाऐं गौशाला में शरण लेती हैं उसी प्रकार आपके उपासक आपकी शरण लेते हैं।🙏🌼
O Almighty God ! You pervade everywhere. Just as cows take shelter in the cowshed to get warmth during the winter, your devotees also take shelter in you.(Rig Ved 10-4-2)
🙏🌼#vedgsawana🙏🌼

