🌸🌸 ।।ओ३म्।। 🌸🌸
🙏 9.04.24 वेद वाणी🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸
प्र ते यक्षि प्र त इयर्मि मन्म भुवो यथा वन्द्यो नो हवेषु।
धन्वन्निव प्रपा असि त्वमग्न इयक्षवे पूरवे प्रत्न राजन्॥ ऋग्वेद १०-४-१॥
हे परमेश्वर ! मैं यज्ञनिक कर्मों द्वारा आपसे संयुक्त होता हूं। मैं अपने विचार और प्रार्थना आपका प्रकाश पाने के लिए करता हूं जिससे कि जीवन के संघर्ष में मैं सफल हो सकूं। आप मेरे लिए मरूप्रदेश में प्याऊ के समान है।🙏🌸
O God! I unite with you through Yajnik acts. I direct my thoughts and prayers to seek your light so that I may succeed in the struggle of life. You are like a drinking water dispenser for me in the desert.(Rig Ved 10-4-1)
🙏🌸#vedgsawana🙏🌸

