🌻🌻 ।।ओ३म्।। 🌻🌻
🙏 5.04.24 वेद वाणी🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻
अग्रे बृहन्नुषसामूर्ध्वो अस्थान्निर्जगन्वान्तमसो ज्योतिषागात्।
अग्निर्भानुना रुशता स्वङ्ग आ जातो विश्वा सद्मान्यप्राः॥ ऋग्वेद १०-१-१॥🙏🌻
पूर्व के क्षितिज से भोर में उषा की पहली किरण अंधकार को समाप्त करने लगती है। सूर्य का प्रचंड प्रकाश संसार में उजाला कर देता है। उसी प्रकार प्रातःकाल हमें भी उठकर व्यायाम, योग, ध्यान, स्वाध्याय आदि करके अपना संपूर्ण विकास करना चाहिए।🙏🌻
The first ray of dawn from the eastern horizon begins to eliminate darkness. The mighty light of the sun illuminates the world. In the same way, we should also get up in the morning and do exercise, yoga, meditation, self-study, etc. to develop ourselves in all respects.
(Rig Ved 10-1-1)
🙏🌻#vedgsawana🙏🌻

