🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼
🙏 27.03.24 वेद वाणी🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼
स वाज्यक्षाः सहस्ररेता अद्भिर्मृजानो गोभिः श्रीणानः॥ ऋग्वेद ९-१०९-१७॥🙏🌼
पवित्र संतों से प्राप्त ज्ञान द्वारा एक उपासक अपने कर्मों को शुद्ध करता है। इस प्रकार वह आत्मा के दिव्य ज्ञान को परिपक्व करता है।🙏🌼
A devotee purifies his Karmas with the knowledge acquired from holy saints. That way, he matures the divine knowledge of the soul.
(Rig Ved 9-109-17)
🙏🌼#vedgsawana🙏🌼

