🌸🌸 ।।ओ३म्।। 🌸🌸
🙏 05.03.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸
त्वां रिहन्ति मातरो हरिं पवित्रे अद्रुहः।
वत्सं जातं न धेनवः पवमान विधर्मणि॥ ऋग्वेद ९-१००-७॥🙏🌸
हे सबको पवित्र करने वाले परमात्मा ! नकारात्मकता और राग द्वेष से रहित मनुष्य आपसे उसी प्रकार प्रेम करते हैं जैसे कि एक गाय अपने नवजात बछड़े से करती है। हे पापों और दुखों का नाश करने वाले प्रभु ! ऐसे मनुष्य आपके आनंद को अपने पवित्र ह्रदय में धारण करते हैं।🙏🌸
God, who purifies everyone ! People devoid of negativity, attachment, and hatred, love you in the same way a cow loves her newborn calf. O Lord, who destroys sins and sorrows ! Such people hold your joy in their sacred hearts.(Rig Ved 9-100-7)
🙏🌸#vedgsawana🙏🌸

