🌺🌺 ।।ओ३म्।। 🌺🌺
🙏 12.02.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺
सिंहं नसन्त मध्वो अयासं हरिमरुषं दिवो अस्य पतिम्।
शूरो युत्सु प्रथमः पृच्छते गा अस्य चक्षसा परि पात्युक्षा॥ ऋग्वेद ९-८९-३॥🙏🌺
परमात्मा का सोम जो सिंह के समान वीरता, आनंद और मधुरता प्रदान करता है। जो मनुष्य ऐसे सोम को ग्रहण करता है वह परमात्मा पारायण हो जाता है। ऐसा सोम उसकी ज्ञान द्वारा रक्षा भी करता है और उसके जीवन को सफल बनाता है।🙏🌺
God’s Soma, which provides bravery like a lion, joy, and sweetness, The person who takes such Soma becomes devoted to God. Such Soma also protects him with knowledge and makes his life successful.(Rig Ved 9-89-3)
🙏🌺#vedgsawana 🙏🌺

